रविवार 18 जनवरी 2026 - 07:01
ईरानी बा इज़्ज़त और बा शऊर जनता ने अपने बुजुर्गो और विद्वानो की माअइयत मे इक़्तेदार और वक़ार को हासिल किया

हौज़ा हज़रत आयतुल्लाहिल उज़्मा जवादी आमोली ने कहाः इस्लामी गणतंत्र ईरान की बा इज़्ज़त और बा शऊर जनता जिसने बुर्ज़गो और विद्वानो की माउइयत मे इस इक़्तेदार और वक़ार को हासिल किया है। अल्लाह तआला ईरान की उस महानता और गरिमा को दुआ ए तवस्सुल के माध्यम से सुरक्षित रखे।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, आतुल्लाहिल उज़्मा जवादी आमोली ने साप्ताहिक दर्से अखलाक़ मस्जिद आज़म क़ुम मे लोगो के विभिन्न वर्गो की उपस्थिति मे आयोजित हुआ।

उन्होने नहजुल बलाग की हिकमत 192 का वर्णन करते हुए कहा कि अमीरुल मोमेनीन (अ) फ़रमाते है (या इब्ना आदमा, मा कस्बता फ़ौक़ा क़ुव्वतेका, फ़अंता फ़ीहे ख़ाजे़नुन लेग़ैरेका) अर्थात आदम के पुत्र, तूने अपने भोजन से जो अधिक कमाया है उसमे दूसरो को ख़ज़ानची है। बस जो व्यक्ति भी अपनी ज़रूर से अधिक उपलब्ध करता है तो उसने गोया उसे दुसरो के लिए भंडार किया है और उनके लिए छोड़ दिया है।

इस मरजा ए तक़लीद ने कहा इस कथन से यह भी निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि आप अपनी ज़रूरत से अधिक दूसरो के लिए काम कर सकते है और समाज गरीबी से बचाने के लिए प्रयास कर सकते है।

उन्होने काम, पैदावार, और रोज़गार के महत्व पर जोर देते हु एकहा कि काम और पैदावार वह बेहतरीन नेमत और सेवा है जो समाज को गरीबी से बचाती है। जब तक हम जीवित है हमे काम और पैदावार को आगे बढ़ाना चाहिए और समाज से गरीबी को समाप्त करना चाहिए क्योकि गरीब समाज गरीबो का उपकरम बन जाता है।

आयतुल्लाह जवादी आमोली ने अंत मे कहा इस्लामी गणतंत्र ईरान के पास बा वक़ार और शान व शैकत की हामिल जनता है जिन्होने बुजुर्गो और विद्वानो के साथ मिल कर इस शान और शौकत को हासिल किया है। अल्लाह तआला इस महानता और वक़ार को

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